गलतीयों से जुदा , वो भी नहीं मैं भी नहीं ……….
दोनो इन्सान हैं.. खुदा वो भी नहीं मैं भी नहीं ………….
वो मुझे मैं उसे इल्जाम देते हैं मगर ……….
अपने अन्दर झांकते, वो भी नहीं मैं भी नहीं ……….
गलत-फहमियों ने कर दी, दोनो में पैदा दूरीयाँ ………
वरना फितरत के बुरे वो भी नहीं मैं भी नही ………….
इस घुमती जिन्दगी में दोनो का सफर जारी रहा ……….
एक लम्हे को रूकते वो भी नहीं मैं भी नही ……….
मानते दोनो बहुत एक दूसरे को हैं मगर ………
ये हकीकत जानते वो भी नहीं मैं भी नहीं ………..
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I found this on FaceBook and thought I would rather share it with friends. Very delightful to read such nice piece.